Sunday, 15 November 2015

तू लगावे लू जब लिपीस्टिक......

प्रश्न- कालजयी गीत 'तू लगावे लू जब लिपीस्टिक" पर  टार्च लेकर प्रकाश डालें....
उत्तर....
भावर्थ ." तू लगावेलू जब लिपीस्टिक" भोजपुरी की सबसे वैज्ञानिक  आध्यात्मिक, कालजयी और महान कृति है...कवि सीरी जाहिद कुमार 'जाहील'  और गायक श्री फलाना  सिंह   ने इस अनुपम रचना से साहित्य संगीत कि जो सेवा की है. उसे इतिहास से लेकर भूगोल तक की किताबों में दर्ज किया जाएगा....
यही ऐसा गीत है जिसने भोजपुरी को ग्लोबल लैंग्वेज बनाने का काम किया है..  आप  झुमरी तलैया से लेकर  झरिया और भभुआ से लेकर भटिंडा तक के  किसी डीजे वालों  और मोहनिया से लेकर मुर्शिदाबाद के किसी खोमचे वाले से   साफ़ साफ़   सुन सकतें हैं....इस गीत ने लोकप्रियता के सारे खम्बों को  उखाड़ पखाड़ कर  माटी में मिलाने का काम किया है.....इस महान रचना ने धर्म मजहब,क्षेत्रवाद,भाषावाद की झंझटों को कम करके एक बार फिर साबित कर दिया है कि भारत एक सहिष्णु देश है...  सौंदर्य और श्रृंगार , प्रेम तो हमारी संस्कृति का हिस्सा ही नहीं वरन इसमें कूट कूट कर भरा है..... यहां लालू और मैगी के भी अच्छे दिन यूँ ही नहीं आ जाते..ये हमारी उदार सनातनी लोक परम्परा का द्योतक है..यही हमारा सौंदर्य है।
गीत से स्पष्ट है कि  लिपीस्टिक की लीला अपरम्पार है और नायिका  को सौंदर्य प्रसाधन से बहुत गहिरा प्रेम है...वो दस दिन बिना पानी पीये रह सकती है पर दस मिनट बिना लिपीस्टिक के नहीं रह सकती.....वो सुबह शाम खाने के साथ रोटी में घी की जगह लिपीस्टिक का प्रयोग करती है।
नायिका ने इस हठयोग के सहारे इतनी सिद्धि प्राप्त कर लिया है कि वो अपने कमरिया करे लपालप  के एक झटके से आरा,देवरिया,टाटा,गोरखपुर  समेत गाजीपुर बलिया को हिला  कर भूकम्प के भावी झटको से आगाह कर सकती है....डिजास्टर मैनेजमेंट वालों ने इस नायिका से सम्पर्क साध कर भूकम्प सम्बन्धी शोध में मदद की अपील किया है....कहतें हैं नायिका को लिपीस्टिक सिद्ध है.. नायक भी उसके प्यार में पप्पू हो गया है... सो  उसे सब कुछ हिलता हुआ दिख रहा है... पप्पू आजकल  बीटेक्स की पढ़ाई छोड़कर लिपीस्टिक के लिये लोन लेने की सोच रहा है...
उधर पक्का महाल की पिंकी ने अपने मजनू से झगड़ा कर लिया है....कहती है 'मुझे ये टेडी बियर नहीं लिपीस्टिक चाहिये डार्लिंग" मजनू कल  बैंक में लोन  के लिये एप्लीकेशन भरते हुए पाया गया ।
अब तो हाल ये है कि   एस्थेटिक्स के सारे शोध  छात्र लिपीस्टिक पर ही शोध करना चाहतें हैं... लिपीस्टिक सफलता का पर्याय बन जायेगी ये किसी ने सोचा नहीं था
हिंदी के कुछ असफल रिसर्च स्कॉलरों ने..."नव रीतिकाल का समाज शास्त्रीय अध्ययन..तू लगावे लू जब लिपस्टिक के' सन्दर्भ में "  नामक टॉपिक पर  रजिस्ट्रेशन भी करा लिया है।
कुछ तो समाजवाद की असीम अनुकम्पा से इस विषय पर शोध कर  शहीद कतवारु लाल यादव  इंटर कालेज में लेक्चरर होकर तनख्वाह लूटने का काम भी कर रहें हैं।
लेकिन सबसे बड़ी समस्या ये है कि दुनिया के सारे वैज्ञानिक परेशान हैं...भई...आखिर  लिपीस्टिक से किसी शहर को कैसे हिलाया डुलाया  जा सकता है? किसी गाँव की छैल छबीली  गोरिया की कमरिया  आखिर लॉलीपॉप कैसे हो सकती है। ?
इसी बीच जबसे पता चला है कि भोजपुरी के तमाम गीतकार और लेखक बहुते  टेक्निकली रिच हैं..मल्लब कि वो वो लहंगा को रिमोट से उठा सकतें हैं..लिपीस्टिक से जिला हिला सकतें हैं...यहाँ तक की 'परधनवा के गन्ना में' बराक ओबामा को बुला सकतें हैं....  चुम्मा से जतरा बना सकतें हैं...तबसे आइंस्टीन और न्यूटन के अस्तित्व पर खतरा उत्पन्न हो गया है...सारे सापेक्षता के नियम और ला आफ मोशन को लूज मोशन आने  शुरू हो गये हैं।
इस चिंता से ग्रस्त होकर नासा ने भोजपुरी के तमाम गायकों सर्वश्री डब्बू 'डेंजर'  बबलू 'बवाली' सोहन लाल  'सहकल'  मनोज  'मुरझाइल'   के साथ ही  पल्टू 'परदेसी'  मुन्ना 'नादान' खेदन सिंग 'खतरनाक' जैसे गीतकारों को  ससम्मान अपने यहाँ आमंत्रित कर ये जानना चाहा है कि "लिपीस्टिक से आरा बलिया छपरा टाटा गोरखपुरन को हिलाने की विधि पर  प्रकाश  डालें.."
पता चला है कि इस क्यूट से गीत को सुनने के बाद  तमाम दिल के मरीजों को आराम मिला है....कुपोषण से लेकर मानसिक विक्षिप्तता में भी इस गीत ने खासा  असर पैदा कर चिकित्सा जगत को चकाचौंध कर   दिया है.....अब तो डाक्टर भी दवाई लिखने के बाद ये जरुर कहता है कि कृपया दवा खाने के बाद "तू लगावेलू जब लिपीस्टिक' सुन कर चार बार दायें चले" तत्काल आराम मिलेगा.....
इस गीत ने आध्यात्मिक जगत पर खासा प्रभाव डाला है....."थर्ड आई आफ निर्मल बाबा" में बाबा ने सबको समोसे के साथ लिपीस्टिक खाने का सुझाव दिया है..बाबा कहतें हैं  इससे तत्काल सन्तान प्राप्ति होगी।
इस गीत को सबसे ज्यादा किसी ने आत्मसात किया है तो वो हैं श्री एक लाख चार सौ बीस राधे माँ ...उन्होंने तो अपने भक्तों को शरीर में तेल की जगह लिपिस्टिकि के प्रयोग का सुझाव दिया है।
सरकार भी लिपीस्टिक पर आयात शुल्क घटाकर सभी नाजनीयों को  लिपस्टिक पर सब्सिडी  देने की सोच रही है।
उत्तर प्रदेश सरकार भी जल्द ही 'समाजवादी लिपीस्टिक योजना' लाकर समाजवाद को मजबूत करने का काम करने वाली है।
गुप्त रोग विशेषज्ञ हकीम एस के जैन असली वाले (लन्दन से सम्मानित) ने भी अपने एक ताजा साक्षात्कार में कहा है कि
देश के सारे बौद्धिकों को लिपीस्टिक का सेवन जरूर करना चाहिए... ये मानसिक सेहत के लिए किसी शिलाजीत से कम शक्तिशाली नहीं हैं....साथ ही डॉक्टर जैन असली वाले ने ये बताया है कि कुछ बुद्धिजीवी अपने वाम अंग में    यदि जापानी तेल  के साथ लिपीस्टिक मिलाकर मसाज  करें तो इससे उनके वैचारिक शीघ्रपतन में तुरन्त आराम मिलेगा।

4 comments:

  1. गजब की लेखनी है आपकी

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  2. गजब की लेखनी है आपकी

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