Wednesday, 17 February 2016

जनता तो आपको मारेगी कामरेड...

पहले आप कहते थे कि चार जज कैसे तय कर सकते है कि अफ़जल अपराधी है?
आज जब  सब आप पर थू थू करने लगे तो आपको संविधान पर एकाएक भरोसा हो गया....एकएक देश प्रेम बढ़ गया।
अब आप कहते हैं कि संविधान को अपना काम करने देना चाहिए।
इतना बढ़िया यू टर्न तो केजरी सर भी नही मारते।
अभी जो कन्हैया के साथ हो रहा  ऐसा नहीं होना चाहिए...
लेकिन  एक ऑटो वाला, चाय वाला,रिक्शा वाला, जो न  सीपीआई का मतलब जानता है न आरएसएस का वो भी जब सुनता है कि  jnu,amu और जादवपुर यूनिवर्सिटी में भारत को कुछ लोग बर्बाद करना चाहते हैं
तो सबसे पहले यही कहता  कि "घुस के  मारों सालों...नमक हरामों को....छोडो मत..
ये किसी राजनैतिक नहीं. आपके प्रति आम जन मानस की मानसिकता है कि आप भारत के हवा पानी में रहते हैं और यहीं को बर्बाद करना चाहते हैं"..
आप तमाम कुतर्कों से खुद को जस्टिफाई करते रहिये....नैतिकता ज्ञान और तर्कों की मोटी मोटी किताबे पढ़ते रहिये.....आप विद्वान हैं..जो आपसे तर्क  करेगा वो मूढ़ और संघी होगा।
लेकिन अब आत्ममुग्धता से निकलने का समय है कामरेड...जो थोड़ा बहुत बचा खुचा है वो भी हाथ से निकलता जा रहा।
अब सब जान गए हैं  कि आप  जल,जंगल,जमीन से उखड़ गए हैं।
आप भारत चीन युद्ध में चीन के साथ थे. इमरजेंसी लगी तब इंदिरा जी के साथ खड़े थे।
पूरा देश जब दुर्गा पूजा मनाता है आप महिषासुर की पूजा करते हैं...
देश का बहुसंख्यक जिस गौ को माँ मानता है उसके मांस का आप सार्वजिनक भोज करवाते हैं....आप याकूब, अफज़ल, और इशरत के लिए कैंडील मार्च निकालतें हैं.... बस्तर में  जब देश के जवान मारे जाते हैं तो आप विजय दिवस मनाते हैं.... पूरा देश जब हनमन थप्पा के लिए हाथ जोड़कर खड़ा है तब आप भारत के बर्बादी की कामना करते हैं....
आपके एजेंडे में भारत कभी था ही नहीं...न ही आप भारत के साथ  थे...    आपने ऐसा क्या किया अब तक कि भारत का आम जनमानस आपके  प्रति संवेदनशील हो जाए..आपसे जुड़ा हुआ महसूस करे?
मान लेते हैं आपके अनुसार  कि आप नारे लगाने वाले लोगों में से नहीं थे.
तो उन नारे लगाने वालों के खिलाफ आपने कितनी बार  कोई प्रोटेस्ट किया?...उनको पकड़वाने में पुलिस की मदद कि आपने?..मत कहिये वन्दे मातरम् और भारत माता की जय.. लेकिन एक बार भी आपने  उन नक्सलियों और अलगाववादियों के  खिलाफ पोस्टर बैनर चिपकाया जो पल पल देश बांटने की कामना करतें हैं........आप सड़क पर तुरन्त "किस आफ लव" कर देते हैं..आपने कितनी बार  देश विरोधी मानसिकता वालों के खिलाफ मानव श्रृंखला बनाई?..आप ढोलक बजाकर प्रधानमंत्री को भँड़वा कह देते हैं...लेकिन डफली बजाकर देश की बर्बादी की कामना करने वालों की कितनी बार भर्त्सना की आपने?
जब इस देश का होकर आप इतना नहीं कर सकते तो आप लाख बुद्धिजीवी हों..तर्क वादी हों...प्रगतिशील हों...सहिष्णुता की दूकान आप चलाते हों....लेकिन देश की जनता पागल नही कि आप  जो भी करें उसे  बर्दास्त करेगी वो   आपको मारेगी कामरेड...आरती नहीं उतारेगी।
मत भूलिए कि देश और समाज की सिम्पैथी के लिए देश और समाज से जुड़ना पड़ता है... 
इस देश की आम जनता  सड़क पर गिरा पत्थर पूज सकती है..लेकिन  देश विरोधी देवता को नहीं।

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